अवैध शराब का वीडियो बनाना पड़ा भारी, कार्यकर्ता से मारपीट व मोबाइल छीनने का आरोप
प्रदर्शन और थाने में शिकायत, प्रशासन पर निष्क्रियता के गंभीर सवाल
विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज/ जबलपुर शहर में अवैध शराब कारोबार को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित प्रतिष्ठित होटल एंड बार 'ऋषि रीजेंसी' में कथित तौर पर अवैध शराब उतारने के आरोपों के बीच, सामाजिक संगठन 'भगवती मानव कल्याण संगठन' के कार्यकर्ताओं के साथ अभद्रता और मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के बाद से शासन और प्रशासन की कार्यवाही पर भी सवाल उठने लगे हैं।
क्या है मामला
संगठन के कार्यकर्ताओं रूप सिंह लोधी, नवल सिंह लोधी, रामजी पटेल और महेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि मंगलवार रात वे सिविल लाइन स्थित दूसरे पुल के पास ऋषि रीजेंसी होटल के सामने थे। इस दौरान उन्होंने एक बोलेरो पिकअप गाड़ी में भारी मात्रा में शराब उतारते देखा। कार्यकर्ताओं ने इस संदिग्ध गतिविधि का वीडियो बनाना शुरू किया। तभी होटल का मैनेजर और गाड़ी में सवार दो अन्य लोग मौके पर पहुंच गए और उनके साथ हाथापाई शुरू कर दी।
हमला, कपड़े फाड़ने और मोबाइल छीनने का आरोप
कार्यकर्ता रूप सिंह लोधी के अनुसार, होटल मैनेजर और उसके 3-4 साथियों ने न केवल उनके साथ मारपीट की, बल्कि उन्हें घसीटते हुए होटल बिल्डिंग तक ले गए। आरोप है कि इस दौरान उनके कपड़े भी फाड़ दिए गए और अहम सबूतों से भरा उनका मोबाइल फोन छीनकर वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाया गया। संगठन का दावा है कि बाद में छीना गया मोबाइल फोन फॉर्मेट कर दिया गया, जिससे सारे सबूत नष्ट हो गए।
प्रदर्शन और थाने में शिकायत
घटना के बाद पीड़ित कार्यकर्ता और संगठन के अन्य सदस्य सिविल लाइन थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। वहीं, बुधवार को बड़ी संख्या में संगठन के कार्यकर्ता होटल के सामने एकत्रित हुए और जमकर प्रदर्शन किया। उन्होंने नारेबाजी करते हुए हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, मोबाइल वापस दिलाने और अवैध शराब कारोबार की निष्पक्ष जांच की मांग की। सूचना मिलने पर सिविल लाइन थाना पुलिस और नगर पुलिस अधीक्षक सोनू कुर्मी मौके पर पहुंचे, हालांकि, लंबे समय तक होटल के बाहर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
प्रशासन पर निष्क्रियता के आरोप
संगठन के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शिकायत के बावजूद शाम 6 बजे तक पुलिस ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं की। इसके अलावा, होटल मालिक ने सीसीटीवी कैमरे चेक नहीं कराए, जबकि मौके पर पहुंची आबकारी विभाग की टीम ने केवल बार में रखी बीयर की बोतलों की गिनती की और शराब की खेप को लेकर कोई जांच नहीं की। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि होटल मालिक को सीसीटीवी फुटेज दिखाने के लिए भी बाध्य नहीं किया गया, जिससे साफ है कि पूरे जिले में शराब माफियाओं की खुली गुंडागर्दी और अवैध शराब का परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है, जिसके सामने आबकारी और पुलिस प्रशासन पूरी तरह पस्त नजर आ रहा है।
गौरतलब है कि ऋषि रीजेंसी होटल का बार लाइसेंस वर्ष 2021 में भी विवादों में रह चुका है और प्रशासन ने तब कार्रवाई करते हुए लाइसेंस रद्द किया था। वहीं, भगवती मानव कल्याण संगठन इससे पहले भी जबलपुर समेत आसपास के इलाकों में अवैध शराब के खिलाफ अभियान चला चुका है। फिलहाल, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बार सरकारी मशीनरी शराब माफियाओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी या एक बार फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
