पीएसएम के सभागृह में "निपुण विद्यालय रोडमैप 2026-27" के शुभारंभ
कलेक्टर का संबोधन"कोई भी स्कूल पीछे नहीं रहना चाहिए"
विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर/ आज निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर पर सफल बनाने और जिले के प्रत्येक बच्चे को बुनियादी साक्षरता (पढ़ना-लिखना) एवं संख्याज्ञान (FLN) में दक्ष बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक कड़ी एवं रणनीतिक पहल शुरू की है। इसी क्रम को पीएसएम के सभागृह में "निपुण विद्यालय रोडमैप 2026-27" के शुभारंभ हेतु एक भव्य एवं ऐतिहासिक जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ परंपरागत रूप से माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं वंदना के साथ हुआ, जिसने पूरे सभागृह को ज्ञान एवं ऊर्जा से भर दिया। इस अवसर पर जिले के शिक्षा विभाग एवं प्रशासन के सभी वरिष्ठ अधिकारी एक मंच पर उपस्थित हुए।
कलेक्टर का संबोधन: "कोई भी स्कूल पीछे नहीं रहना चाहिए"
कार्यशाला के मुख्य अतिथि कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में जिले के समस्त विद्यालयों को निपुण शालाओं के रूप में विकसित करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि "निपुण रोडमैप का उद्देश्य केवल आंकड़े भरना नहीं, बल्कि बच्चों के अधिगम स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित करना है। हमें हर शाला को चरणबद्ध रूप से निपुण बनाना है, चाहे वह ग्रामीण हो या शहरी।"
इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए कलेक्टर महोदय ने सभी अधिकारियों, बीआरसी, बीएसी एवं शिक्षकों को सतत मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। साथ ही, उनके नेतृत्व में सभी उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को "निपुण विद्यालय संकल्प शपथ" दिलाई गई, जिसमें सभी ने समय सीमा में विद्यालयों को निपुण बनाने का संकल्प लिया।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन
इस प्रभावी कार्यशाला में सीईओ जिला पंचायत अभिषेक गहलोत एवं संयुक्त संचालक श्री घनश्याम सोनी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने निपुण लक्ष्यों को प्राप्त करने में विभिन्न विभागों के समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए शिक्षकों का मनोबल बढ़ाया।
विस्तृत कार्ययोजना (एक्शन प्लान) पर चर्चा
कार्यशाला में आगामी दिनों की कार्ययोजना पर पीपीटी के माध्यम से विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया, जिसमें निम्नलिखित रणनीति पर सहमति बनी:
1. सर्वे एवं आकलन (Assessment): सर्वप्रथम विभिन्न अधिकारियों के दल जिले की प्रत्येक शाला में जाकर बच्चों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान की वर्तमान स्थिति का वास्तविक आकलन करेंगे।
2. फीडबैक एवं समीक्षा (Feedback): आकलन रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक विद्यालय की कमियों एवं आवश्यकताओं को चिन्हित किया जाएगा।
3. सतत निगरानी (Continuous Monitoring): चिन्हित कमियों को दूर करने के लिए सतत मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, ताकि समय-समय पर प्रगति की समीक्षा की जा सके।
इन वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने लिया भाग
कार्यशाला में जिला शिक्षा अधिकारी श्री गौतम बर्वे, डीपीसी योगेश शर्मा, डाइट प्राचार्य वाई.एन. द्विवेदी, एपीसी राजेश तिवारी, आर.के. उपाध्याय, श्री अजय रजक, सुरेंद्र जैन एवं रत्नेश मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त निपुण टीम से प्रियांक मंडल, विवेक तिवारी, राजा शुक्ला, पंखुड़ी आनंद, सेजल एवं जिले के समस्त बीआरसी, बीएसी, जनशिक्षक तथा अन्य विभागों के अधिकारीगण भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल एवं सुचारू संचालन बीएसी अजय रजक ने किया, जिन्होंने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अधिकारियों का धन्यवाद किया।
यह कार्यशाला जबलपुर जिले के शैक्षिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। प्रशासन की इस सख्ती एवं प्रतिबद्धता से निश्चित ही आने वाले वर्षों में जबलपुर के सभी विद्यालय 'निपुण विद्यालय' बनकर पूरे प्रदेश के लिए आदर्श प्रस्तुत करेंगे।