162 वे रामलीला का शोभायात्रा में श्री राम और रावण युद्ध देखने उमरी भीड़ - Bhaskar Crime

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162 वे रामलीला का शोभायात्रा में श्री राम और रावण युद्ध देखने उमरी भीड़

*संस्कारधानी 162 वे रामलीला का शोभायात्रा में श्री राम और रावण युद्ध देखने उमरी भीड़*


 धर्म, राजनीति और समाज का जीवंत चित्रण देखने मिला

मुख्य चल समारोह का समापन अहंकार के प्रतीक दशानन रावण के वध के साथ होगा,

विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर। नगर निगम तीन पट्टी चौक से पूजा-अर्चना के पवित्र अनुष्ठान के साथ शुभारंभ हुए 162 वर्ष प्राचीन श्री गोविंदगंज रामलीला समिति के ऐतिहासिक मुख्य दशहरा चल समारोह ने इस बार भी पूरे शहर को भक्ति, संस्कृति और सामाजिक संदेशों से सराबोर कर दिया। धूमधाम और भव्यता के साथ निकले इस चल समारोह ने न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक प्रस्तुत किया, बल्कि जीवंत झांकियों के माध्यम से समाज को दिशा देने का कार्य भी किया।

धर्म-राजनीति-समाज: तीनों का अनूठा संगम

हर वर्ष की भांति इस बार भी रामलीला जुलूस की झांकियों में धर्म, राजनीति और समाज  तीनों पहलुओं का सजीव चित्रण देखने को मिला। समिति द्वारा जी-तोड़ मेहनत और महीनों की तैयारी के बाद तैयार की गई विभिन्न झांकियों को जनता के बीच आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए। तरह-तरह के जतन और नवाचार इस बार की झांकियों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुए।

राष्ट्रीय स्वाभिमान से सजी झांकियां

इस वर्ष के चलित झांकी में राष्ट्रीय स्वाभिमान, सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करती प्रेरणादायी प्रस्तुतियां और धार्मिक संदेश देने वाली अनेक झांकियां निकाली गईं। इनमें विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे:

· राम-रावण युद्ध की भव्य प्रस्तुति

· कुंभकरण, मेघनाथ और रावण के विशाल पुतले

· हनुमान जी की प्रेरणादायी झांकी

ये सभी झांकियां जनाकर्षण का प्रमुख केंद्र बनीं और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ी।

समिति का संकल्प: मर्यादा और संस्कृति का प्रतीक

समिति के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर गर्व से बताया कि पूरे देश में एक मात्र रामलीला समिति है जो प्रभु श्री राम जी के द्वारा स्थापित मर्यादा, अनुशासन, धर्म, संस्कृति और संस्कार को आधार बनाकर कार्य करती है। यह समिति अपनी 162 वर्षों की गौरवशाली परंपरा में निरंतर इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।

इस अवसर पर समिति के व्यास पंडित वासुदेव शास्त्री, संरक्षक रवि गुप्ता, राकेश डी.पी. पाठक, महंत मोहन महाराज, रवीन्द्र मघरिया, विजय सरावगी, राजकुमार गुप्ता, राकेश पाठक, अरुण दुबे, गुड्डा रैकवार, राजेश पाठक, कमल किशोर तिवारी, पवन पांडे, महामंत्री मनीष पाठक, मंगू गोयल, अजय तिवारी, किशन अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, चप्पू गुप्ता, मुकेश पाठक, पप्पू अग्रवाल, गुलहला सहित बड़ी संख्या में समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

दशानन वध के साथ समापन

मुख्य चल समारोह का समापन अहंकार के प्रतीक दशानन रावण के वध के साथ होगा, जिसे स्वयं भगवान श्रीराम अपने हाथों से अंजाम देंगे। इसके पश्चात रामलीला में रावण वध लीला का भव्य मंचन किया जाएगा, जो इस ऐतिहासिक आयोजन का समापन बिंदु होगा।

सांस्कृतिक विरासत का गौरवशाली प्रतीक

162 वर्षों की अखंड परंपरा को समेटे यह चल समारोह न केवल जबलपुर की सांस्कृतिक विरासत का गौरव है, बल्कि धर्म, संस्कृति और सामाजिक चेतना का जीवंत उदाहरण भी है। धर्मप्राण जनता की अपार श्रद्धा और समिति के अथक परिश्रम से यह आयोजन प्रत्येक वर्ष नई ऊंचाइयों को छूता है और समाज को सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।