90 वर्ष पूर्ण होने पर 'अभ्युदय' और 'राष्ट्रोदय' पथ संचलन में कदम से कदम मिलाकर चलीं सैकड़ों सेविकाएँ - Bhaskar Crime

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90 वर्ष पूर्ण होने पर 'अभ्युदय' और 'राष्ट्रोदय' पथ संचलन में कदम से कदम मिलाकर चलीं सैकड़ों सेविकाएँ

*संस्कारधानी जबलपुर में नारी शक्ति का अभूतपूर्व प्रदर्शन*

राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने पर 'अभ्युदय' और 'राष्ट्रोदय' पथ संचलन में कदम से कदम मिलाकर चलीं सैकड़ों सेविकाएँ

परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला राष्ट्र सेविका समिति के नौ दशक पूर्ण होने पर जबलपुर में गूंजा नारीशक्ति का राष्ट्रभाव

नागरिकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर किया अभिनंदन

विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर/ संस्कारधानी  में सोमवार को नारीशक्ति, अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत और अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समिति के नर्मदा भाग द्वारा 'अभ्युदय पथ संचलन' तथा कृषि भाग द्वारा 'राष्ट्रोदय पथ संचलन' का भव्य आयोजन किया गया। एक ही दिन हुए इन दोनों संचलनों में गणवेशधारी सेविकाओं ने कदम से कदम मिलाकर संगठन की एकजुटता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का सशक्त संदेश दिया।

कदमों में अनुशासन, चेहरे पर आत्मविश्वास और मन में राष्ट्रसेवा का संकल्प लिए सेविकाएँ जब शहर की सड़कों से गुज़रीं, तो नागरिकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया। नन्हीं बालिकाओं से लेकर वरिष्ठ सेविकाओं तक की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने आयोजन को विशेष और यादगार बना दिया। शहर के विभिन्न स्थानों पर सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने सेविकाओं की अनुशासित कदमताल, गणवेश और एकजुटता की सराहना करते हुए समिति की 90 वर्षों की साधना के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

नर्मदा भाग: 'अभ्युदय पथ संचलन'  मालवीय चौक से हुआ शुभारंभ

नर्मदा भाग का 'अभ्युदय पथ संचलन' दोपहर 3:30 बजे मालवीय चौक स्थित अंजुमन इस्लामिया स्कूल से प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध समाजसेवी एवं प्रखर वक्ता श्रीमती स्वप्ना गुप्ता (निदेशक, एम.एम. इंटरनेशनल स्कूल, जबलपुर) उपस्थित रहीं। मुख्य वक्ता के रूप में श्रीमती करुणा क्षत्रिय (प्रांत बौद्धिक टोली सदस्य, राष्ट्र सेविका समिति) ने अपने ओजस्वी विचार रखे।

मुख्य वक्ता करुणा क्षत्रिय का उद्बोधन: आद्य संचालिका मौसी जी लक्ष्मीबाई केलकर का स्मरण

'अभ्युदय पथ संचलन' को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता श्रीमती करुणाप्रभा क्षत्रिय ने राष्ट्र सेविका समिति की आद्य संचालिका वंदनीय मौसी जी लक्ष्मीबाई केलकर के जीवन और कार्यों का भावपूर्ण स्मरण किया। उन्होंने अपने उद्बोधन का आरंभ समिति की प्रार्थना की इन प्रेरणादायी पंक्तियों से किया:

"आनंद का हो भाव उर में, सत्य का पाथेय देना।

जब चुनौती सामने हो, शौर्यमय उत्साह देना।।"

श्रीमती क्षत्रिय ने कहा कि आद्य संचालिका वंदनीय मौसी जी लक्ष्मीबाई केलकर ने नारी शक्ति के निरंतर जागरण, सांस्कृतिक पुनरुत्थान और राष्ट्र निर्माण का अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने कहा कि मौसी जी द्वारा रोपा गया यह विचार आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है, जिसकी छाया में लाखों मातृशक्तियाँ राष्ट्रकार्य के लिए समर्पित हैं।

वरिष्ठ सेविकाओं के योगदान को नमन करते हुए उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि उनका पथ कंटकमय था। अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने त्याग, तपस्या और परिश्रम से समिति के कार्य को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि आज पथ संचलन में जो पुष्प वर्षा हो रही है, वह उन्हीं वरिष्ठ सेविकाओं के परिश्रम का परिणाम है। यह समाज द्वारा समिति के कार्य को मिल रहे स्नेह और सम्मान का प्रतीक है।

अपने उद्बोधन के समापन पर श्रीमती क्षत्रिय ने सभी सेविकाओं से आह्वान किया कि वे वरिष्ठ सेविकाओं के आदर्शों को आत्मसात करते हुए ध्येय के प्रति निष्ठा और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने समिति के गीत की इन पंक्तियों के साथ अपनी बात पूर्ण की:

"ध्येय निष्ठा धारणा दृढ़, कोटि पग प्रतिपल बढ़ें,

साधना करती चलें हम, साधना करती चलें।"

कृषि भाग: 'राष्ट्रोदय पथ संचलन'  धनी की कुटिया से निकला जनसैलाब

कृषि भाग का 'राष्ट्रोदय पथ संचलन' अधारताल स्थित धनी की कुटिया मैरिज गार्डन से हुआ, जहाँ शाम 4 बजे एकत्रीकरण रखा गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सखी वैश्य (कुलसचिव, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, अधारताल) उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती राजेश्वरी कौरव (नगर पुलिस अधीक्षक, अधारताल, जबलपुर) उपस्थित रहीं। मुख्य वक्ता श्रीमती मनीषा चौहान (प्रांत बौद्धिक टोली सदस्य एवं विभाग बौद्धिक प्रमुख, सिवनी) ने सेविकाओं का मार्गदर्शन किया।

मुख्य वक्ता मनीषा चौहान का उद्बोधन: "प्रभाव से परिवर्तन की ओर"  90 वर्षों की यात्रा का सूत्र

'राष्ट्रोदय पथ संचलन' को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता श्रीमती मनीषा चौहान ने राष्ट्र सेविका समिति की 90 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस दीर्घ कालखंड में समिति ने केवल संगठन का विस्तार नहीं किया, बल्कि व्यक्ति, परिवार और समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की एक सशक्त परंपरा खड़ी की है।

श्रीमती चौहान ने कहा कि इन नौ दशकों में कितनी ही सेविकाओं ने अपने जीवन को नई दिशा दी, कितने ही परिवारों में संस्कार पहुँचे और कितने ही समाजों में सेवा का भाव जागृत हुआ। कितनी ही बहनों में आत्मविश्वास जागा, कितनी ही बालिकाओं ने नेतृत्व का पाठ सीखा और कितनी ही महिलाओं ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रकार्य के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा कि यदि इन 90 वर्षों को एक सूत्र में बाँधना हो, तो वह सूत्र होगा  "प्रभाव से परिवर्तन की ओर।" इस सूत्र की विस्तृत व्याख्या करते हुए उन्होंने परिवर्तन की क्रमबद्ध प्रक्रिया को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि एक विचार का प्रभाव पड़ा और उस प्रभाव से व्यक्ति बदला। जिस व्यक्ति में परिवर्तन आया, उसने अपने जीवन को राष्ट्रकार्य के लिए समर्पित किया। व्यक्ति के बदलने से परिवार बदला, परिवार से समाज बदला और समाज के परिवर्तन से राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

अपने उद्बोधन के समापन में श्रीमती चौहान ने दृढ़ स्वर में कहा, "यही राष्ट्र सेविका समिति की यात्रा है।" उन्होंने उपस्थित मातृशक्ति से आह्वान किया कि वे इस विचार को आत्मसात कर अपने-अपने क्षेत्र में परिवर्तन की वाहक बनें और राष्ट्र निर्माण के इस महाअभियान में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।

नागरिकों का उत्साहवर्धन: पुष्पवर्षा से हुआ भव्य स्वागत

संचलन के दौरान शहर में अनेक स्थानों पर नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर सेविकाओं का अभिनंदन किया। उनकी अनुशासित कदमताल, गणवेश और एकजुटता ने सबका ध्यान खींचा। नागरिकों ने उत्साह से स्वागत करते हुए समिति की 90 वर्षों की साधना और समाज में उसके कार्यों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। पूरे मार्ग में राष्ट्रभक्ति के नारों और समिति के गीतों की गूंज ने वातावरण को उत्साह और जोश से भर दिया।

राष्ट्र सेविका समिति: नौ दशकों की साधना और संकल्प

राष्ट्र सेविका समिति पिछले 90 वर्षों से महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, संस्कार, सेवा भावना और राष्ट्रभाव के जागरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। समिति का मूल मानना है कि संस्कारवान और जागरूक नारी से परिवार सशक्त होता है, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र मजबूत बनता है। इसी विचार को जन-जन तक पहुँचाने के लिए दोनों पथ संचलन आयोजित किए गए। इन संचलनों ने यह सिद्ध कर दिया कि नारी शक्ति जब संगठित और अनुशासित होकर आगे बढ़ती है, तो वह राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला बन सकती है।

मुख्य बिंदु एक नज़र में:

· राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने पर जबलपुर में दो भव्य पथ संचलन

· नर्मदा भाग का 'अभ्युदय पथ संचलन' मालवीय चौक से, कृषि भाग का 'राष्ट्रोदय पथ संचलन' अधारताल से

· सैकड़ों गणवेशधारी सेविकाओं ने कदम से कदम मिलाकर दिया अनुशासन और एकजुटता का संदेश

· नागरिकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर किया भव्य स्वागत

· मुख्य वक्ताओं ने आद्य संचालिका मौसी जी लक्ष्मीबाई केलकर के जीवन और समिति की 90 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला

· "प्रभाव से परिवर्तन की ओर" समिति की नौ दशकों की यात्रा का सूत्र