आयुष्मान योजना में बड़ा खेल का आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने किया खुलासा - Bhaskar Crime

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आयुष्मान योजना में बड़ा खेल का आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने किया खुलासा

*आयुष्मान योजना में बड़ा खेल का आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने किया खुलासा*

*आयुष्मान योजना में सूची में 45 स्टाफ होने का दावा, लेकिन मौके पर जांच में सिर्फ 15 स्टाफ ही मिले*

*मध्यप्रदेश सरकार कर्जदार, डॉक्टर करोड़पति,EOW ने दर्ज किया मामला,अन्य शहरों में भी जांच की मांग*

विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज भोपाल। गरीब परिवारों को बेहतर इलाज की गारंटी देने वाली आयुष्मान भारत योजना में भोपाल से सामने आया एक गंभीर मामला पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर रहा है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने करोंद स्थित एक निजी अस्पताल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की है, जिसमें योजना के तहत करोड़ों रुपये के फर्जी क्लेम का खुलासा हुआ है।

कागजों में 45, हकीकत में सिर्फ 15

जांच में पता चला है कि अस्पताल ने आयुष्मान योजना में सूचीबद्धता के दौरान कागजों में 45 स्टाफ होने का दावा किया था, लेकिन मौके पर जांच में सिर्फ 15 स्टाफ ही मिले। इसके अलावा पैथोलॉजी सुविधा और अन्य संसाधनों को भी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। यह साफ संकेत है कि सूचीबद्धता और उसके बाद की निगरानी में बड़ी चूक हुई है।

सृष्टि अस्पताल में दर्ज थे आयुष्मान हितग्राहियों के इलाज

EOW की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि सृष्टि अस्पताल में दर्ज आयुष्मान हितग्राहियों के इलाज के आधार पर सरकार से कितनी राशि का भुगतान हुआ और कथित अनियमितताओं का उन क्लेम पर क्या प्रभाव पड़ा। अस्पताल वर्ष 2023 में आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध हुआ था। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि सूचीबद्धता के दौरान डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, पैथोलॉजी सुविधा और वास्तविक संसाधनों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ?

EOW ने दर्ज किया मामला

EOW ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। एजेंसी अब कथित भुगतान और मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि क्या इसी तरह का खेल अन्य अस्पतालों में भी चल रहा है।

सरकार कर्जदार, डॉक्टर करोड़पति

इस मामले ने एक बड़ी विडंबना को उजागर किया है। एक ओर जहां मध्यप्रदेश सरकार आयुष्मान योजना के भुगतान को लेकर कर्जदार बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर कथित अनियमितताओं के जरिए डॉक्टर करोड़पति बन रहे हैं। योजना का उद्देश्य गरीब मरीजों तक इलाज पहुंचाना है, लेकिन इस तरह के खेल से योजना की मंशा पर ही सवाल उठ रहे हैं।

अन्य शहरों में भी जांच की मांग

इस मामले के सामने आने के बाद अब मांग उठ रही है कि आयुष्मान योजना में इस तरह की जांच सिर्फ भोपाल तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के अन्य शहरों—इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर समेत सभी जिलों में भी हो। जांच का असली सवाल केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि सरकारी भुगतान से जुड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में ग्राउंड-लेवल सत्यापन और निगरानी कितनी प्रभावी है।

सख्त निगरानी की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि आयुष्मान योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना में पारदर्शिता और सख्त निगरानी बेहद जरूरी है। सूचीबद्धता से पहले और बाद में नियमित निरीक्षण, स्टाफ और संसाधनों का भौतिक सत्यापन, और क्लेम के भुगतान से पहले मरीजों की वास्तविक जांच अनिवार्य किए जाने चाहिए। तभी योजना का असली लाभ गरीब मरीजों तक पहुंच सकता है और सरकारी खजाने का दुरुपयोग रोका जा सकता है।

EOW की इस कार्रवाई को स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन अब देखना यह होगा कि जांच कितनी गहराई तक जाती है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है या नहीं।