क्लर्क की नौकरी, करोड़ों की बादशाहत! लोकायुक्त ने उखाड़ा पर्दा, पंचायत विभाग के क्लर्क के 5 ठिकानों पर एक साथ छापा - Bhaskar Crime

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क्लर्क की नौकरी, करोड़ों की बादशाहत! लोकायुक्त ने उखाड़ा पर्दा, पंचायत विभाग के क्लर्क के 5 ठिकानों पर एक साथ छापा

*भ्रष्टाचार आरोपी लिपिक के पिछे लगीं एलसीडी से ही पता चलता है इसके ठाट बाट*

 क्लर्क की नौकरी, करोड़ों की बादशाहत! लोकायुक्त ने उखाड़ा पर्दा, पंचायत विभाग के क्लर्क के 5 ठिकानों पर एक साथ छापा

· सुबह 5:30 बजे लोकायुक्त की 'गुड मॉर्निंग', सिवनी-जबलपुर में कंपकंपी; महंगे फार्महाउस से लेकर कृषि भूमि तक मिला खजाना

· चतुर्थ श्रेणी से क्लर्क बना 'रईस'! पत्नी के नाम जमीनें, खुद के नाम ठाट-बाट, अब बैंक बैलेंस भी खंगालेगी एलसीडी

विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर/सिवनी। मध्य प्रदेश की लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ एक और ठोस कार्रवाई करते हुए  सुबह पंचायत विभाग में तैनात एक लिपिक के खिलाफ ऐसा बड़ा एक्शन लिया, जिससे पूरे विभाग में हड़कंप मच गया। आरोपी लिपिक ने सरकारी नौकरी को 'जमीन-जायदाद' जोड़ने का जरिया बना लिया था, और उसकी इसी 'ठाट-बाट' ने उसकी कमर तोड़ दी।

मामला है क्लर्क सुभाष शर्मा का, जो पंचायत विभाग में पदस्थ हैं। लोकायुक्त को इनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की गंभीर शिकायत मिली थी। प्रारंभिक सत्यापन में शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई, जिसके बाद लोकायुक्त की टीम ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर कमर कस ली। बिना कोई सुराग लीक हुए, टीम ने आज सुबह करीब 5:30 बजे ही जाल बिछा दिया।

कहाँ-कहाँ पड़ा छापा

लोकायुक्त की टीम ने जबलपुर और सिवनी जिलों में फैले आरोपी के पाँच ठिकानों पर एक साथ धावा बोला। इनमें उसका मुख्य निवास, एक आलीशान फार्म हाउस और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। जब सुबह-सुबह लोकायुक्त की टीम ने दरवाजे खटखटाए, तो आरोपी के होश उड़ गए।

क्या-क्या मिला? (संपत्ति का ब्योरा)

छापेमारी के दौरान लोकायुक्त के हाथ करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति के दस्तावेज लगे हैं। आइये, सरकारी क्लर्क की इस 'करोड़पति' डायरी पर डालते हैं नज़र:

· पत्नी के नाम जमीनों का कारोबार: आरोपी सुभाष शर्मा ने अपनी पत्नी शीला शर्मा के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि योग्य भूमि के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में कई भूखंड (प्लॉट) खरीद रखे हैं।

· फार्म हाउस और मकानों की भरमार: सिवनी और जबलपुर के प्रतिष्ठित इलाकों में बने मकानों और एक विशाल फार्म हाउस के कागजात बरामद हुए हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ संपत्तियों की अकेले कीमत करोड़ों में है।

· ठाट-बाट: जांच टीम के अनुसार, फर्श से लेकर छत तक, गाड़ियों से लेकर बैंक लॉकर तक, आरोपी का रहन-सहन और संपत्ति उसकी नौकरी के 'ग्रेड' को शर्मसार कर रही थी। टीम अब एलसीडी (लोकायुक्त जांच दल) की मदद से इनकी असली बाजार कीमत (मार्केट वैल्यू) का सत्यापन कर रही है।

सबसे बड़ा खुलासा :

जांच में चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि सुभाष शर्मा ने अपनी सेवा शुरू चतुर्थ श्रेणी  कर्मचारी के रूप में की थी। पदोन्नति पाकर वह लिपिक (क्लर्क) बना, यानी एक निम्न-स्तरीय अधिकारी, लेकिन उसकी संपत्ति किसी बड़े उद्योगपति को भी मात देने वाली है। सवाल उठता है कि आखिर सरकारी बाबू ने इतनी संपत्ति कैसे जुटाई?

क्या हो रहा है अभी

लोकायुक्त की टीम अभी भी आरोपी के बैंक खातों, लॉकरों और दस्तावेजों की बारीकी से छानबीन कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आय और संपत्ति के बीच वास्तविक अंतर  की गणना कर सार्वजनिक की जाएगी, जो शायद अरबों में भी हो सकती है। फिलहाल, पंचायत विभाग में खलबली मची हुई है और अन्य कर्मचारियों में भी दहशत का माहौल है।

कड़ी नजर: लोकायुक्त ने साफ कर दिया है कि चाहे जितना भी छोटा पद हो, भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई सरकारी तंत्र में बैठे अन्य भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए एक सख्त संदेश है। इस पूरे मामले में टीम अब बेनामी संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही है।