*सागर कांड के बाद जबलपुर में हड़कंप! शासन की मुंहतोड़ जवाबी कार्रवाई की मांग*
*ज्ञापन में कहा जहरीली शराब को गांव - गांव भेजा जा रहा है इसकी जांच होनी चाहिए*
*सागर की घटनाओं के बाद अब आबकारी विभाग और पुलिस विभाग द्वारा एक्शन करे*
*सागर के बंडा में जहरीली शराब से 22 मौतों के बाद भगवती मानव कल्याण संगठन ने उठाया मोर्चा, आबकारी और पुलिस प्रशासन पर सवाल, चेतावनी- 'नहीं रुकी तो बड़ा आंदोलन'
विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर सागर जिले के बंडा में जहरीली शराब से 22 लोगों की मौत और 112 से अधिक लोगों के बीमार पड़ने के बाद अब जबलपुर में भी हड़कंप मच गया है। भगवती मानव कल्याण संगठन ने आज जबलपुर के थाना बेलखेड़ा, थाना शहपुरा, थाना पाटन और एसडीओपी पाटन को ज्ञापन सौंपकर शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
संगठन के कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन में कहा कि जिस तरह सागर के बंडा में जहरीली शराब ने तबाही मचाई, उसी तरह जबलपुर जिले में भी शराब माफियाओं द्वारा अवैध और जहरीली शराब को गांव-गांव भेजा जा रहा है। संगठन ने इसकी तत्काल जांच और अपराधियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की मांग की है।
'सागर जैसी घटना कहीं भी हो सकती है'
संगठन के पदाधिकारियों ने चेताते हुए कहा कि सागर जैसी दर्दनाक घटना कभी भी कहीं भी हो सकती है। अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाना बेहद जरूरी है। संगठन ने आरोप लगाया कि वे लगातार अवैध शराब पर कार्रवाई करा रहे हैं, लेकिन न तो आबकारी विभाग और न ही पुलिस प्रशासन इस खतरे की गंभीरता समझ रहा है।
गौरतलब है कि सागर कांड में शराब ठेकेदार समेत 30 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और 10 को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, 3 आबकारी अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इसके बावजूद संगठन का कहना है कि जबलपुर में अवैध शराब का कारोबार बेरोकटोक जारी है।
'नहीं रुकी तो बड़ा आंदोलन करेंगे'
संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर अवैध शराब को गांव-गांव भेजने से नहीं रोका गया, तो संगठन बहुत जल्द बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि अवैध परिवहन लोगों के लिए कितना जानलेवा हो सकता है, इस पर प्रशासन को तुरंत ध्यान देना चाहिए और अवैध शराब कारोबार को पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए।
बता दें कि इससे पहले जनवरी 2026 में भी जबलपुर में जहरीली शराब से 19 मौतों का आरोप लगा था और स्थानीय लोगों ने एसपी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा था। अब एक बार फिर यह मामला सामने आया है, जिससे प्रशासन की नाकामी साफ झलकती है।