शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं का आतंक,राष्ट्रीय हिन्दू महासभा ने किया कड़ा विरोध - Bhaskar Crime

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शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं का आतंक,राष्ट्रीय हिन्दू महासभा ने किया कड़ा विरोध

*शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं का आतंक,राष्ट्रीय हिन्दू महासभा ने किया कड़ा विरोध*

*हनुमानताल में विगत दिनों एक मौत; निगम प्रशासन की 'अंधी' कार्यप्रणाली पर सवाल*

विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर। शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं (गाय, बैल, भैंस) का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। हनुमान ताल क्षेत्र में आवारा जानवरों के कारण एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिसके बावजूद नगर निगम प्रशासन की आंखें आज तक नहीं खुलीं। नगर निगम आयुक्त और उनके अधिकारियों की इस 'अंधी' और लापरवाह कार्यप्रणाली के खिलाफ राष्ट्रीय हिन्दू महासभा ने कड़ा विरोध जताया है।

(विगत दिनों हनुमानताल थाना एक व्यक्ति की मौत के बाद मामला अज्ञात बनाया गया )

राष्ट्रीय हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अरुण पाण्डेय ने नगर निगम आयुक्त को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि नगर निगम सीमा के अंदर हजारों की संख्या में आवारा पशु तांडव मचा रहे हैं। ये पशु न सिर्फ आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर रहे हैं, बल्कि जानलेवा भी साबित हो रहे हैं।

निगम का तंत्र पूरी तरह फेल:

संगठन ने आरोप लगाया कि नगर निगम की हांका गैंग जब इन पशुओं को पकड़कर ले जाती है, तो पशु मालिक जुर्माना अदा करके उन्हें वापस ले आते हैं और फिर उन्हें सड़कों पर छोड़ देते हैं। निगम प्रशासन की इस ढीली नीति और कमजोर कार्रवाई के कारण ही शहर में कई बार हादसे हो चुके हैं। हनुमान ताल जैसी घटनाएं इस बात का सबूत हैं कि निगम अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ चुके हैं।

नगर निगम आयुक्त से सख्त कार्रवाई की मांग:

संगठन के ओपी मिश्रा, व्हीपी शुक्ला और डॉ. आशीष श्रीवास्तव आदि ने नगर निगम प्रशासन से सख्ती से पेश आने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर निगम आयुक्त और उनकी टीम आवारा पशुओं को शहर से बाहर नहीं करती और पशु मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करती, तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

सवाल: आखिर कब तक नगर निगम आयुक्त की लापरवाही के चलते शहरवासियों को अपनी जान गंवानी पड़ेगी? हनुमान ताल क्षेत्र में हुई मौत के बाद भी निगम का अंधा रवैया बेहद शर्मनाक है। प्रशासन को तत्काल प्रभाव से सड़कों को आवारा पशुओं से मुक्त कराना सुनिश्चित करना चाहिए।