देश का पहला मंदिर: जहाँ सूर्य उदय से पहले माता को जल अर्पित किया जाता है - Bhaskar Crime

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देश का पहला मंदिर: जहाँ सूर्य उदय से पहले माता को जल अर्पित किया जाता है

*देश का पहला मंदिर जो सूर्य उदय से पहले, मूर्ति को जल अर्पित किया जाता है*

*प्रदेश की सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर जौ घनी बस्तियों के बीच में है*

जबलपुर की आराध्य देवी बड़ी खेरमाई माता मंदिर, 800 साल पुराना ऐतिहासिक धाम

    विशेष रिपोर्टर मनोज विश्वकर्मा 

क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर, मध्य प्रदेश। संस्कारधानी जबलपुर के भानतलैया स्थित ऐतिहासिक बड़ी खेरमाई माता मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर है, जहाँ सूर्य उदय से पहले मूर्ति को जल अर्पित किया जाता है। यह मंदिर न केवल प्रदेश की सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों में शुमार है, बल्कि घनी बस्तियों के बीच स्थित होकर भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

नवरात्रि में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

नवरात्रि और विशेष पर्वों के दौरान इस मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु माता को जल अर्पित करने और दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से नवरात्रि के 9 दिनों में माताओं और बहनों की भारी भीड़ रहती है। शहर के दूर-दूर से लोग माता के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं।

सुबह 4 बजे से लगती है भक्तों की कतारें

मंदिर में जल चढ़ाने का समय नवरात्रि और विशेष दिनों पर सुबह करीब 4:00 बजे से ही शुरू हो जाता है। भक्तों की लंबी कतारें सुबह-सुबह ही लगनी शुरू हो जाती हैं, जो देर शाम तक जारी रहती हैं।

800 साल पुराना मंदिर, संस्कारधानी की आराध्य देवी

यह मंदिर लगभग 800 साल पुराना है और संस्कारधानी जबलपुर की आराध्य देवी के रूप में माना जाता है। यहाँ नवरात्रि में प्रतिदिन माता का भव्य श्रृंगार होता है, जिसके दर्शन के लिए भक्त उमड़ते हैं।

मंदिर की प्रमुख विशेषताएँ

· देश का पहला मंदिर, जहाँ सूर्य उदय से पहले मूर्ति को जल अर्पित किया जाता है

· स्थान: भानतलैया, जबलपुर, मध्य प्रदेश

· आयु: लगभग 800 वर्ष प्राचीन

· महत्व: संस्कारधानी जबलपुर की आराध्य देवी

· जल चढ़ाने का समय: नवरात्रि व विशेष दिनों में सुबह 4:00 बजे से

· भीड़: नवरात्रि के 9 दिनों में माताओं-बहनों की विशेष भीड़

· विशेष: नवरात्रि में प्रतिदिन माता का भव्य नौ श्रृंगार

आस्था और परंपरा का संगम

बड़ी खेरमाई माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह अपनी अनोखी परंपरा के कारण भी पूरे देश में विशिष्ट स्थान रखता है। सूर्य उदय से पहले जल अर्पित करने की परंपरा इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है। घनी बस्तियों के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का अटूट केंद्र बना हुआ है।

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