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माँ बड़ी खेरमाई मंदिर में महाअष्टमी पर माता का विशेष और अलौकिक श्रृंगार

जबलपुर के भानतलैया स्थित माँ बड़ी खेरमाई मंदिर में महाअष्टमी पर माता का विशेष और अलौकिक श्रृंगार

          मनोज विश्वकर्मा=सम्पादक (चीफ एडिटर)

क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर जबलपुर के भानतलैया स्थित प्रसिद्ध माँ बड़ी खेरमाई मंदिर में महाअष्टमी के दिन माता का विशेष और अलौकिक श्रृंगार किया जाता है। इस वर्ष महाअष्टमी के मौके पर माँ बड़ी खेरमाई का दिव्य श्रृंगार महाचामुंडा देवी के स्वरूप में किया जाएगा, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

गोंडी पूजन परंपरा का निर्वहन

मंदिर में गोंडवाना काल से चली आ रही गोंडी पूजन परंपरा के अनुसार, यह परंपरागत श्रृंगार और पूजन आदिवासी परिवारों द्वारा संपन्न कराया जाता है। यह परंपरा सदियों से निरंतर चली आ रही है, जिससे मंदिर की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है।

विशेष श्रृंगार और आभूषण

शारदीय नवरात्रि के दौरान नौ अलग-अलग दिनों में माँ का अलग-अलग स्वरूपों में श्रृंगार किया जाता है। मंदिर के दरबार को सोने और चांदी के आभूषणों तथा धार्मिक चिन्हों—जैसे त्रिशूल, डमरू, सूर्य और चंद्रमा—से भव्य रूप से सजाया जाता है, जो माता के दिव्य स्वरूप को और भी भव्य बना देता है।

दर्शन और महाआरती का आयोजन

महाअष्टमी के दिन मंदिर में विशेष दर्शन और अनुष्ठान होते हैं। यहाँ रात्रि 8:00 बजे से दर्शन प्रारंभ होते हैं और रात 12:00 बजे भव्य महाआरती का आयोजन किया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और आरती में सम्मिलित होने के लिए मंदिर पहुँचते हैं।

माँ बड़ी खेरमाई मंदिर की यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ गोंडवाना काल की सांस्कृतिक विरासत को भी संजोए हुए है। महाअष्टमी पर महाचामुंडा स्वरूप में माता के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है, जिसके चलते मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।