बड़ी खेरमाई माता के जवारा विसर्जन शोभायात्रा धूमधाम और श्रद्धा-भक्ति के साथ निकाली गई - Bhaskar Crime

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बड़ी खेरमाई माता के जवारा विसर्जन शोभायात्रा धूमधाम और श्रद्धा-भक्ति के साथ निकाली गई

संस्कारधानी बड़ी खेरमाई माता के जवारा विसर्जन शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई

हाथों की ज्वाला और महिला और पुरुष भाव खेलते भक्तों की भीड़ को आश्चर्यचकित कर दिया

संस्कारधानी जबलपुर की सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक भक्ति का भव्य प्रदर्शन 

विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर: संस्कारधानी जबलपुर ऐतिहासिक प्राचीन मां बड़ी खेरमाई माता मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में मां बड़ी खेरमाई माता के जवारों की विसर्जन शोभायात्रा धूमधाम और श्रद्धा-भक्ति के साथ निकाली गई। यह शोभायात्रा हजारों संख्या में शाम 8:30 बजे मंदिर प्रांगण से प्रारंभ हुई। 

शोभायात्रा का भव्य स्वरूप:

शोभायात्रा में महिलाओं ने अपने सिर पर जवारे रखे और भक्तों ने अपनी गाल पर छेदकर (गाल पर सुई चुभोकर)

हाथों की ज्वाला और  महिला और पुरुष भाव खेलती भक्तों की भीड़ को आश्चर्यचकित कर दिया। यह दृश्य श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम था। पारंपरिक बैंड बाजा और ढोल-धमाकों की थाप पर संस्कारधानी का माहौल भक्तिमय हो उठा। प्रशासन और शासन द्वारा शोभायात्रा के दौरान व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी।

भक्तों का उमड़ा जनसैलाब:

शोभायात्रा में बड़ी संख्या में भक्त उमड़े और उन्होंने माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। शोभायात्रा का मार्ग दुर्गा चौक, दीनानाथ क्रॉसिंग, जैन मंदिर मालपानी, राजा रसगुल्ला, मिलोनीगंज, घोडिनक्श, थाना हनुमान ताल के सामने हर वर्ष क तरह इस वर्ष भी परंपरागत हनुमानताल घाट मैं जवारों का विसर्जन किया जाएगा 

ट्रस्ट पदाधिकारियों की उपस्थिति:

इस शोभायात्रा में मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शरद अग्रवाल, शशिकांत मिश्रा, सुनील तिवारी (पप्पू पंडित), महेंद्र जांगड़े, जयकांत उपाध्याय, आशीष त्रिवेदी, सुरेश आहूजा, दीपचंद साहू, देवी नामदेव सहित बड़ी संख्या में संस्कारधानी के श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।

विशेष आकर्षण:

· महिलाओं द्वारा सिर पर जवारे लेकर शोभायात्रा में शामिल होना

· भक्तों द्वारा गाल पर बना छेदकर भक्ति प्रदर्शन

· बैंड बाजा और ढोल-धमाकों के साथ भव्य शोभायात्रा

· हनुमानताल घाट पर परंपरागत विसर्जन

संक्षेप में: यह शोभायात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक थी, बल्कि संस्कारधानी जबलपुर की सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक भक्ति का भव्य प्रदर्शन भी थी।