निगम सबसे भ्रष्ट विभाग की खुली पोल लोकायुक्त ने क्लार्क को रिश्वत लेती 20 हजार रंगे हाथ दबोचा - Bhaskar Crime

Breaking

निगम सबसे भ्रष्ट विभाग की खुली पोल लोकायुक्त ने क्लार्क को रिश्वत लेती 20 हजार रंगे हाथ दबोचा

*सबसे भ्रष्ट विभाग की खुली पोल लोकायुक्त ने क्लार्क को रिश्वत लेती 20 हजार रंगे हाथ दबोचा*

लोकायुक्त एसपी का बड़ा एक्शन: नगर निगम के क्लर्क एनओसी के लिए मांगे थे ₹20, हजार हुआ गिरफ्तार

ट्रांसपोर्ट नगर में बैंक लोन के लिए NOC जारी करने के एवज में मांगी थी घूस; लोकायुक्त टीम ने किया ट्रैप

विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर | नगर निगम के एक लिपिक को शुक्रवार को लोकायुक्त की टीम ने ₹20,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी क्लर्क भूमि पर निर्माण कार्य के लिए बैंक लोन की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने के बदले रिश्वत की मांग कर रहा था। इस कार्रवाई ने नगर निगम के उस विभाग की पोल खोल दी है जिसे सबसे भ्रष्ट विभागों में गिना जाता है।

क्या है पूरा मामला?

लोकायुक्त एसपी अंजुलता पटले ने बताया कि ट्रांसपोर्टर अशोक कनकने को ट्रांसपोर्ट नगर, पुरैनी में प्लॉट नंबर 137 आवंटित है। प्लॉट पर निर्माण कार्य कराने के लिए उन्होंने बैंक से ऋण लेने के लिए आवेदन किया था। बैंक ऑफ बड़ौदा प्रबंधन ने ऋण स्वीकृति के लिए नगर निगम से NOC मांगा था।

एनओसी जारी कराने के लिए अशोक कनकने ने नगर निगम की संपदा शाखा में पदस्थ लिपिक आलोक गर्ग से संपर्क किया। आरोप है कि एनओसी जारी करने के बदले लिपिक ने ट्रांसपोर्टर से ₹25,000 की रिश्वत मांगी थी।

शिकायत से ट्रैप तक

रिश्वत की मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त जबलपुर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के सत्यापन की पुष्टि के बाद टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए मौका स्थल पहुंची। शुक्रवार को जैसे ही शिकायतकर्ता अशोक कनकने ने आरोपी लिपिक आलोक गर्ग को ₹20,000 दिए, ताक में बैठी लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।

आरोपी की पहचान

आरोपी बाबू आलोक गर्ग नगर निगम की संपदा शाखा में लिपिक पद पर पदस्थ था। लोकायुक्त टीम में रेखा प्रजापति, राहुल गजभिए, शशि मरसकुले सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

क्यों अहम है यह कार्रवाई

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नगर निगम के संपदा शाखा में इस तरह की रिश्वतखोरी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। लोकायुक्त की इस सफल ट्रैप कार्रवाई से उन आम नागरिकों को राहत मिली है जो सरकारी दफ्तरों में छोटे-छोटे कामों के लिए परेशान किए जाते हैं। फिलहाल आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।